Sunday, 12 April 2026

नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक ऐतिहासिक कदम

 नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक ऐतिहासिक कदम है। 

भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में 20 सितंबर 2023 की तारीख स्वर्णिम अक्षरों मे दर्ज हो चुकी हैं क्योंकि इसी दिन 76 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद, प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व मे, भारत की आधी आबादी को नारी शक्ति वंदन अधिनियम के जरिए 33% आरक्षण मिला और समावेशी राजनीति की नीव रखी गई। 

वर्षों से नीति निर्माण में महिलाओं की आवाज़ सीमित रही है। 

यह बदलाव कितना अवश्यक है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारतीय राजनीति और भारत के पहले चुनाव में महिला भागीदारी मात्र 4.4% थी जो 2010 तक महज 10.87% ही पहुंच सकी। राजनीतिक  सशक्तिकरण की यह गाथा केवल सामाजिक और अर्थिक विकास तक सीमित नहीं है। अनगिनत योजनाओं के माध्यम से महिलाओं के सामजिक और अर्थिक विकास से शुरू हुआ सफर आज राजनीतिक विकास तक पहुंच चुका है।

अब नारी केवल लाभार्थी नहीं अपितु विकास की सारथी होगी। 

यह केवल एक कानून नहीं, बल्कि एक सामाजिक परिवर्तन की आधारशिला है। जब नारी आगे बढ़ती हैं, तो समाज और अधिक मजबूत और न्यायसंगत बनता है।

महिला नेतृत्व अपने साथ जमीनी अनुभव और दृष्टिकोण लेकर आता है, विषय चाहे वह स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा या आर्थिक सशक्तिकरण का हो, प्रत्येक में नारी का योगदान कानून की व्यापकता और संवेदनशीलता को सुनिश्चित करता है।  इससे शासन अधिक संतुलित, संवेदनशील और जन-आकांक्षाओं के अनुरूप बनेगा।

इस बात में कोई दो राय नहीं कि अगर सुसंस्कृत, सुशिक्षित, संकल्पित, राष्ट्र के प्रति समर्पित, सक्षम, दायित्व बोध से  परिचित नारी को समस्याओं का समाधान ढूंढने का अवसर मिलेगा तो, वह अवश्य ही स्वर्णिम इतिहास रच देगी। 

प्रतिनिधित्व करने का अवसर उन शक्ति स्वरूपाओ को मिलेगा जिनकी शक्ति और सामर्थ्य को, संस्कारों के बोध से, वह स्वयं मर्यादित करना जानती होंगी। सर्व समाज के लिए जिसके हृदय में ममत्व होगा, जो स्वच्छंदता और स्वतंत्रता में भेद करना भलीभांति जानती होंगी। जिन्हें यह पता होगा कि पद अथवा सामर्थ्य को पाने के बाद निष्पक्षता, निडरता और निश्चल भाव से जन प्रतिनिधित्व करना, उनका दायित्व है।  

आधी आबादी नहीं वह संपूर्ण समाज का कल्याण करने हेतु अपने सामर्थ्य का प्रयोग करेगी। वह निर्णय क्षमता का 

प्रयोग कर दायरों को पुन: परिभाषित करेंगी। 

प्रत्येक व्यक्ति अद्वितीय, अद्भुत और अनोखा है। यह आरक्षण  लैंगिक प्रतिस्पर्धा नहीं अपितु नारी की पूर्ण भागीदारी का द्योतक है। हमारी संस्कृतिक विरासत रही नारी का वंदन करने की। स्त्री को शक्ति और सृजन का पर्याय मानने की। 

अगर सुदृढ़ विचार, परिपक्व मानसिकता और सांसारिक शिष्टाचार की समझ वाली नारी को प्रतिनिधित्व मिलेगा, तो  निःसंदेह समाज का कल्याण होगा।

अगर महिला को सामाजिक, आर्थिक, प्रशानिक शक्ति मिलेगी तो निसंदेह ही हमारे विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में वो गति लाएगी और भारत माता का वैभवशाली स्वर्णिम इतिहास पुनः स्थापित होगा। 

हमें इसलिए इस अधिनियम का स्वागत हृदय खोलकर करना चाहिए और यशस्वी प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का आभार व्यक्त करना चाहिए।

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